कुंभलगढ़ दुर्ग के बारे में सामान्य जानकारी

कुंभलगढ़ दुर्ग के बारे में सामान्य जानकारी 

कुंभलगढ़ दुर्ग राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक किला है। इसे महाराणा कुम्भा ने 15वीं शताब्दी में बनवाया था। यह किला अपनी विशाल दीवारों के लिए जाना जाता है, जिसकी लंबाई लगभग 36 किमी है, जो चीन की दीवार के बाद दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार मानी जाती है।

कुंभलगढ़ दुर्ग के बारे में सामान्य जानकारी

मुख्य विशेषताएँ :-

1. अजेय किला  यह किला अरावली की पहाड़ियों पर स्थित है और अपनी प्राकृतिक सुरक्षा के कारण अजेय माना जाता था।

2. कुंभलगढ़ की दीवार: इसकी दीवार इतनी चौड़ी है कि उस पर एक साथ 8 घोड़े चल सकते हैं।

3. महाराणा प्रताप का जन्मस्थान, मेवाड़ के महान योद्धा महाराणा प्रताप का जन्म इसी किले में हुआ था।

4. गणेश मंदिर और नीलकंठ महादेव मंदिर किले में कई प्राचीन मंदिर भी स्थित हैं।

5. यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल: कुंभलगढ़ दुर्ग को 2013 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था।

यह किला राजस्थान के सबसे बेहतरीन पर्यटन स्थलों में से एक है और हर साल हजारों पर्यटक इसे देखने आते हैं।

प्रस्तावना :-

भारत के गौरवशाली इतिहास में राजस्थान के किलों का विशेष स्थान है। इन्हीं में से एक है कुंभलगढ़ दुर्ग, जो राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित है। यह दुर्ग अपनी अभेद्य संरचना, विस्तृत दीवार और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। इसका निर्माण मेवाड़ के राजा महाराणा कुंभा ने 15वीं शताब्दी में करवाया था।

कुंभलगढ़ दुर्ग का इतिहास

कुंभलगढ़ का निर्माण 1443 ई. में महाराणा कुंभा द्वारा करवाया गया था। यह दुर्ग मेवाड़ राज्य की रक्षा के लिए बनाया गया था और इसे अजेय किलों में गिना जाता है। इतिहास में यह स्थान कई महत्वपूर्ण युद्धों का गवाह रहा है। महाराणा प्रताप का जन्म भी यहीं हुआ था, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है।

वास्तुकला और विशेषताएँ

1. मजबूत दीवारें – कुंभलगढ़ की दीवार लगभग 36 किलोमीटर लंबी है, जो इसे चीन की महान दीवार के बाद दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार बनाती है।

2. ऊँचाई और सुरक्षा – यह दुर्ग समुद्र तल से 1100 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, जिससे इसे जीत पाना बेहद कठिन था।

3. सात विशाल दरवाजे – दुर्ग में प्रवेश करने के लिए सात विशाल दरवाजे बनाए गए हैं, जो इसकी सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाते हैं।

4. महल और मंदिर – किले के भीतर बादल महल, नीलकंठ महादेव मंदिर, पार्श्वनाथ मंदिर, वेदी मंदिर जैसे कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल मौजूद हैं।

ऐतिहासिक महत्व

कुंभलगढ़ दुर्ग ने कई युद्ध देखे हैं, लेकिन इसे सीधे युद्ध में जीतना असंभव रहा।

1576 में मुगल सम्राट अकबर के सेनापति मान सिंह प्रथम ने इसे घेरकर कब्जा कर लिया था, लेकिन बाद में यह फिर से मेवाड़ के राजाओं के नियंत्रण में आ गया।

यह दुर्ग महाराणा प्रताप के संघर्ष का साक्षी रहा है।

पर्यटन और वर्तमान स्थिति

आज कुंभलगढ़ दुर्ग यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। हर साल यहां कुंभलगढ़ महोत्सव मनाया जाता है, जो कला और संस्कृति को समर्पित है।

उपसंहार

कुंभलगढ़ दुर्ग राजस्थान के गौरवशाली अतीत और वीरता का प्रतीक है। इसकी भव्यता, मजबूत संरचना और ऐतिहासिक महत्व इसे एक अनमोल धरोहर बनाते हैं। यह दुर्ग भारत की स्थापत्य कला और राजपूत शौर्य का जीवंत उदाहरण है, जिसे आने वाली पीढ़ियों को संरक्षित और सम्मानित करना चाहिए।

ऊपर बताई गई कुंभलगढ़ दुर्ग के बारे में सामान्य जानकारी आपको कैसी लगी हमें काॅमेंट बाक्स में जरूर बताएं।

धन्यवाद।

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