लोक लेखा समिति के वर्तमान अध्यक्ष
लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee – PAC) के अध्यक्ष का पद आमतौर पर विपक्षी दल के वरिष्ठ सदस्य को दिया जाता है। वर्तमान अध्यक्ष का नाम केसी वेणुगोपाल है ।
लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee – PAC) के अध्यक्ष के पास विभिन्न महत्वपूर्ण शक्तियाँ और दायित्व होते हैं। यह समिति सरकार के वित्तीय खर्चों की जांच और समीक्षा करने के लिए जिम्मेदार होती है। अध्यक्ष की शक्तियाँ निम्नलिखित हैं:
1. समिति की बैठकों का संचालन
अध्यक्ष समिति की बैठकों की अध्यक्षता करता है और उनके संचालन की जिम्मेदारी निभाता है।
वे यह तय करते हैं कि समिति किन मुद्दों पर चर्चा करेगी और किन दस्तावेजों की समीक्षा की जाएगी।
2. एजेंडा निर्धारित करना
अध्यक्ष समिति की कार्यसूची (एजेंडा) तय करता है और यह सुनिश्चित करता है कि महत्वपूर्ण वित्तीय मामलों और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों पर चर्चा हो।
समिति के सदस्यों से परामर्श करके यह निर्णय लिया जाता है कि किन मामलों को प्राथमिकता दी जाए।
3. दस्तावेज़ों की माँग और समीक्षा
अध्यक्ष सरकारी विभागों और मंत्रालयों से आवश्यक दस्तावेज़ मंगवाने का निर्देश दे सकता है।
वे यह सुनिश्चित करते हैं कि समिति को सही जानकारी मिले ताकि वह प्रभावी समीक्षा कर सके।
4. अधिकारियों को तलब करने की शक्ति
अध्यक्ष के निर्देश पर सरकारी अधिकारियों, मंत्रालयों के प्रतिनिधियों, CAG और अन्य संबंधित व्यक्तियों को समिति के समक्ष उपस्थित होने के लिए बुलाया जा सकता है।
उनसे सरकारी खर्चों से जुड़े मामलों पर स्पष्टीकरण माँगा जा सकता है।
5. रिपोर्ट तैयार कराना और संसद में प्रस्तुत करना
अध्यक्ष समिति द्वारा तैयार की गई रिपोर्टों को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वे यह सुनिश्चित करते हैं कि समिति की सिफारिशें सरकार और संसद के समक्ष रखी जाएँ।
समिति की रिपोर्ट को लोकसभा अध्यक्ष के माध्यम से संसद में प्रस्तुत किया जाता है।
6. सरकार पर नैतिक दबाव बनाना
लोक लेखा समिति की रिपोर्ट बाध्यकारी नहीं होती, लेकिन इसकी सिफारिशों का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
अध्यक्ष के नेतृत्व में समिति सरकार पर वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और भ्रष्टाचार को रोकने का नैतिक दबाव डालती है।
7. निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना
लोक लेखा समिति का अध्यक्ष, जो आमतौर पर विपक्ष से होता है, यह सुनिश्चित करता है कि समिति की कार्यवाही निष्पक्ष और पारदर्शी हो।
वे सरकार की जवाबदेही तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सीमाएँ (Limitations)
अध्यक्ष केवल सिफारिश कर सकता है, लेकिन सरकार को उन्हें मानने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
यह समिति नीतिगत मामलों पर चर्चा नहीं करती, बल्कि केवल खर्च की समीक्षा तक सीमित रहती है।
लोक लेखा समिति और इसके अध्यक्ष की शक्तियाँ संसद में वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं
लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee – PAC) भारत की संसद की एक स्थायी संसदीय समिति है, जिसका मुख्य कार्य सरकार के वित्तीय खर्चों की जांच करना होता है। यह समिति भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों की समीक्षा करके यह सुनिश्चित करती है कि सरकार द्वारा किए गए व्यय बजट के प्रावधानों और संसद की मंजूरी के अनुरूप हैं या नहीं।
लोक लेखा समिति की प्रमुख विशेषताएँ
1. गठन :
लोक लेखा समिति का गठन पहली बार 1921 में भारत सरकार अधिनियम, 1919 के तहत किया गया था।
वर्तमान में यह समिति प्रतिवर्ष गठित की जाती है।
2. संरचना :
समिति में कुल 22 सदस्य होते हैं – 15 सदस्य लोकसभा से और 7 सदस्य राज्यसभा से।
इसके सदस्यों का चयन आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation) के आधार पर होता है ताकि सभी दलों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
इसमें कोई भी मंत्री सदस्य नहीं हो सकता।
3. अध्यक्ष :-
परंपरागत रूप से इस समिति का अध्यक्ष लोकसभा के विपक्षी दलों के किसी वरिष्ठ नेता को बनाया जाता है।
अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है।
4. कार्य और अधिकार :
सरकारी खर्च की जांच: यह समिति भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्टों की जांच करती है।
संसद द्वारा अनुमोदित व्यय का सत्यापन :- यह सुनिश्चित करती है कि सरकार ने जो खर्च किया है, वह संसद द्वारा स्वीकृत राशि के अनुरूप है या नहीं।
वित्तीय जवाबदेही :- यह समिति वित्तीय कुप्रबंधन, अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को उजागर करती है।
नीतिगत मामलों पर चर्चा नहीं :- यह समिति नीतिगत मामलों पर चर्चा नहीं करती, बल्कि खर्च की विधेयता और वित्तीय अनुशासन पर ध्यान केंद्रित करती है।
5. सीमाएँ :-
यह समिति कार्यपालिका के निर्णयों को पलट नहीं सकती, बल्कि केवल सिफारिशें दे सकती है।
इसकी रिपोर्ट बाध्यकारी नहीं होती, लेकिन सरकार पर नैतिक दबाव बनाती है।
यह नीति-निर्माण में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
लोक लेखा समिति का महत्त्व :-
लोक लेखा समिति संसद में वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली सबसे महत्वपूर्ण संसदीय समितियों में से एक है। यह सरकार को अनुशासित और पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन के लिए प्रेरित करती है।
लोक लेखा समिति के बारे में जानकारी आपको कैसी लगी हमें काॅमेंट बाक्स में जरूर बताएं।
धन्यवाद।